मान बड़ाई ईर्ष्या, दुर्लभ तजना ये।।
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Tuesday, June 2, 2020
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मान बड़ाई ईर्ष्या, दुर्लभ तजना ये।।
Thursday, May 14, 2020
सच्चा सतगुरु
Thursday, May 7, 2020
सच्चा_सतगुरु_कौन
Wednesday, May 6, 2020
#Say_No_To_Alcohol
Monday, February 11, 2019
मुदा है।
आज हम बात करेंगे नशा एक सामाजिक मुदा । नशा एक ऐसी लत है जो एक बार लग जाए तो व्यक्ति का आर्थिक ,मानसिक ,शारीरक नुकसान इतने बड़े पैमाने पर होता है कि बता न मुश्किल है हर क्षेत्र में इतनी हानि होती है कि बर्बाद होकर रह जाते है आज कल के बड़े बुजर्ग तो नशा करते है लेकिन उनके साथ छोटे बच्चे मुख्य रूप से आज कल के
युवा वर्ग में नशा एक फैशन का रूप लिए हुए है युवा वर्ग इस मे इस तरह डूबा हुआ है कि निकलना मुश्किल है इस सब का कारण आज कल की फिल्मी दुनिया के कारण है फिल्मो में दिखाए गए दृश्य है जब फ़िल्म में कोई हीरो हीरोइन किसी कारण से गलत करते है और तो युवा वर्ग भी वही करते है जैसा हीरो हीरोइन कर रहे है जैसे कोई हीरो हीरोइन से प्यार करता है और वो हीरोइन हीरो को धोखा दे देती है और हीरो उस के गम में शराब पीने लग जाता है और किसी गलत काम मे लग जाता है उसी तरह युवा वर्ग कर रहा है इस से वो खुद का तो शरीर का नाश कर रहा है साथ ही अपने परिवार की बर्बादी का कारण बन रहा है और समाज मे हीन की दृष्टि से देखा जा रहा है नशे का असर घर परिवार पर तो पड़ता है साथ ही बच्चों पर इतना गहरा प्रभाव डालता है कि वह भी जैसी संगत में रहता है वैसा ही बन जाता है और उसका वर्तमान और भविष्य दोनो खराब हो जाता है नशे से व्यक्ति अपना सब कूच खो देता है ।
नशा आदत पड़ने के कारण वह व्यक्ति नशे के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाता है कोई उसे बोल दे कि इसकी हत्या करनी है इतने पैसे दूंगा तो वह उसके लिए भी तैयार हो जाता है हमारे देश मे हत्याचार,रेप , भ्रष्टाचार ,हिंसा सब के पीछे नशे का भी हाथ है इस लिए हमे नशे से दूर रहना चाहिए ।मुख्य रूप से बच्चों को इन सब से दूर रखना चाहिए।क्यूंकि इस से उनका भविष्य खराब होता है । एक कारण यह भी है कि नशे में पड़े व्यक्ति को किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा समझाया नही जाता है सब उसको हीन भावना से देखते है ।
नशे से छुटकारा पाने के लिए देखिए साधना टीवी शाम को 7:30 बजे
Saturday, February 9, 2019
राजनीति
घटिया राजनीति और मरता मानव
चाहा तो थी कुछ कर गुजरने की पर मैदान में उतरा तो कीचड़ का दलदल नजर आया।
जी हां दोस्तों ! मैं बात कर रहा हूं वर्तमान भारतीय राजनीति की आज की भारतीय राजनीति समाज की अपेक्षाओं पर अपना ध्यान न देकर केवल राजनेता अपनी कुर्सी बचाने व कुर्सी प्राप्त करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है जनता विकास मांगती है ,राजनेता गंगा की बात करते हैं, जनता रोजगार मानती है राजनेता गाय की बात करते हैं, जनता किसी कारणवश निष्पक्ष न्याय के लिए सीबीआई जांच मांगते हैं नेता सीबीआई को खरीद लेते हैं,
साथियों बड़े दुख के साथ कहना चाहता हूं कि - आखिर हमारे देश की जनता ने क्या बिगाड़ा जो राजनेता "अपना उल्लू सीधा करने" के लिए जनता को भी "कोल्हू का बैल "बना देते
समझदार को संकेत काफी है हम वर्तमान भारतीय राजनीति की बात कर रहे हैं ।
साथियों यह आवाज रुकनी नहीं चाहिए कोशिश करने वालों की हार नहीं होती है
आखिर कब तक यह राजनेता चुनाव के समय तो एक साधु का रूप धारण कर लेते हैं और वोट रूपी भिक्षा मांगने के लिए घर -घर पर आ जाते हैं लेकिन जैसे ही भोली जनता को अपना मत दे देती है, अच्छा जानकर ये विजय होते ही रावण रूपी राक्षक का रूप धारण कर देते हैं और जिस वोट रूपी भिक्षा से इनको जो पद प्राप्त हुआ है इनका दुरुपयोग शुरू कर देते हैं ,और जिन्होंने इनको वोट दिया उनके साथ ही अत्याचार करते रहते हैं ,और जनता की ना सुनकर अपनी मनमर्जी करते रहते हैं
साथियों में यह दुख भरी कहानी इसीलिए कहना चाहता हूं
की अच्छे काम की शुरुआत हमेशा अपनों से ही की जाती है तो अब समय है ऐसी चापलूसी करने वाले राजनेताओं को उचित समय उचित जवाब देने का । मैं यहां पर किसी भी पार्टी के पक्ष विपक्ष की बात नहीं कर रहा हूं मैं आम जनता के दर्द की बात कर रहा हूं , कि आज के राजनेता जनता की दर्द भरी कहानियां ना समझ कर सिर्फ मोटी मोटी बातें बना कर हमारे संविधान के प्रति समर्पित ना होकर अपना घर बनाने में लगते हैं, साथियों अब समय है जागरूक होने का
क्योंकि कहते हैं कि" हम सुधरेंगे युग सुधरेगा""
साथियों ! यहां पर हम सुधरने का अर्थ है "जागरूक होना"
जागरूकता के बारे में तो आपने सुना ही होगा कि हमें हमेशा जागरुक रहना चाहिए ताकि हमारा कोई भी शोषण न कर सके तो आज शिक्षित समाज हैं ।
तो हम अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रह सकते हैं ।
लेकिन बड़े दुख के साथ कहना चाहता हूं कि जब कोई भी व्यक्ति वर्तमान समय में जागरूकता लाने के लिए या दूसरों को जागरूक करने के लिए या स्वयं जागरूक होने पर आज के राजनेता उनकी बातों को अपनी कुर्सी की ताकत से दबाना चाहते हैं।
साथियों ! लेकिन कब तक यह अपनी बात को दबाएंगे, मैंने पहले भी कहा था कि यह सूरत बदलनी चाहिए कोशिश करने वालों की हार नहीं होती ।
ये कार्य संत रामपाल जी महाराज ने किया लेकिन दुर्भाग्यवश बात है कि चापलूसी भरी गंदी राजनीति के राजनेताओं ने उनकी बात को अपने कुर्सी के दम पर दबाने की कोशिश की और अभी भी कोशिश कर रहे हैं । अपना पूरा दम लगा रहे हैं कि संत रामपाल जी महाराज ने जो आज के सिस्टम के खिलाफ अर्थात आज की गंदी राजनीति के खिलाफ आवाज उठाई उनको दबाया जाए आज भी उनकी बात को दबाने की पूरी कोशिश की जा रही है क्योंकि आज के राजनेता यही चाहते हैं कि जनता में से कोई भी उनके(राजनेता) खिलाफ आवाज उठाएं सिस्टम को जानने की कोशिश करें उनकी बात को दबा कर झूठे मुकदमे लगा कर जेल में डाल दिया जाए ताकि कोई दूसरा व्यक्ति भी उनके खिलाफ आवाज नहीं उठा सके साथियों आज के राजनेता तो अंग्रेजो से भी विकराल रूप धारण कर चुके हैं ,लेकिन यह कब तक चलेगा आखिरकार इन चापलूसी भरी राजनीति में इन भ्रष्ट राजनेताओं की पोल खोलनी ही होगी ,और आज पूरा देश सोशल मीडिया के माध्यम से यह जान गया है कि संत रामपाल जी महाराज निर्दोष है इनको एक पूरे षड्यंत्र के द्वारा फसाया गया है
लेकिन कहते है, आज के राजनेता पैसे से मीडिया को खरीद सकते हैं लेकिन आज की शिक्षित जनता को नहीं खरीद सकते आज की जनता शिक्षित होने के नाते यह समझ रही है कि अब सिस्टम बदलना चाहिए यह सूरत बदलनी चाहिए अगर आप भी वर्तमान राजनीति में बदलाव चाहते हो और इस सिस्टम को जानकर बदलाव चाहते हो तो हमसे जुड़िए
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धन्यवाद.......
Sunday, November 4, 2018
कुल का मालिक एक है। वह मानव सदृश्य तेजोमय शरीर युक्त है।जिसके एक रोम कूप का प्रकाश करोड़ो सूर्य और करोड़ो चन्द्रमाओ की रोशनी से भी अधिक है। उसी ने नाना रूप बनाये है।
परमेश्वर का वास्तविक नाम अपनी अपनी भाषाओं में कविर्देव(वेदों के सस्कृत भाषा में) , हक्का कबीर(श्री गुरु ग्रंथ साहेब में पृष्ट न.721 पर क्षेत्रीय भाषा में), सत कबीर(श्री धर्मदास जी की वाणी में क्षेत्रीय भाषा में),बंदी छोड़ कबीर(संत गरीब दास जी के सद्ग्रन्थ में क्षेत्रीय भाषा में),कबीरा,कबीरन,खबिरा, खबीरन(श्री कुरान शरीफ सूरत फुर्कानी न.25 आयत न.19 21 52,58,59 में क्षेत्रीय अरबी भाषा मे)। इसी पूर्ण ब्रह्म के कई उपात्मक नाम अनामी पुरुष,अगम पुरुष , अलख पुरूष, सतपुरुष,अकाल मूर्ति, शब्द स्वरूपी राम,पूर्ण ब्रह्म,परम् अक्षर ब्रह्म आदि है।
जो शक्ति अंधे को आँख प्रदान करे,गूंगे को आवाज,बहरे को कानो से श्रवण करवा दे,बांझ को पुत्र दे,निर्धन को धनवान बना दे, रोगी को स्वस्थ कर दे जिसके यदि दर्शन हो जाये तो अति आंनद हो,जो सर्व ब्रह्मांडो का रचनहार,पूर्ण शांतिदायक जगतगुरु तथा सर्वज्ञ है,जिसकी आज्ञा बिना पत्ता भी नही हिल सकता ऐसे गुण जिसमे है वह वास्तव में प्रभु कहलाता है।
कबीर जी अपना वास्तविक ज्ञान देने के लिए चारो युग में भी स्वयं प्रकट हुए। सतयुग में सत्सुकृत नाम से,त्रेता में मुनिन्दर ,द्वापर में करुणामय,तथा कलयुग में कबीर नाम से प्रकट हुए।
पूर्ण प्रभु कबीर साहेब जी सतयुग में सत सुकृत नाम से स्वयं प्रकट हुए उस समय गरुड़ जी,श्री ब्रह्मा जी विष्णु जी तथा शिव जी आदि को सतज्ञान समझाया था।
जब तक आद्यात्मिक ज्ञान नही,तब तक तो जीव माया के नशे में अपना उद्देश्य भूल चुका था ठीक वैसे ही जैसे कि शराबी नशे में गर्मी के दिनों में दोपहर में धूप में पड़ा पड़ा पसीने व रेत में सना भी कह रहा होता है की मौज हो रही है परंतु नशा उतरने के बाद उसे पता चलता है कि तू तो जंगल मे पड़ा है,घर तो अभी दूर है।
कबीर जी ने कहा है कि :-
कबीर यह माया अटपटी,सब घट आन पड़ी।
किस किस ने समझाउ ,या कुए भांग पड़ी।।
आद्यात्म ज्ञान रूपी औषधि सेवन करने से जीव का नशा उतर जाता है फिर वह भक्ति के सफर पर चलता है।
हम गुरु के बिना भक्ति तो कर सकते है लेकिन व्यर्थ प्रयत्न रहेगा क्योंकि परमात्मा का विधान है कि:-
गुरु बिन माला फेरते,गुरु बिन देते दान।
गुरु बिन दोनो निष्फल है,पूछो वेद पुराण।।
कबीर राम कृष्ण से कोन बड़ा ,उन्हु भी गुरु कीन्हा।
तीन लोक के वे धनी,गुरु आगे आधीन।।
कबीर राम कृष्ण बड़े तिन्हुँ पुर राजा।
तीन गुरु बंद कीन्ह निज काजा।
Kabir is real god
🙏🙏
DivinePlay Of GodKabir
“ शेखतकी द्वारा कबीर साहेब को गुंड़ों से मरवाने की निष्फल कुचेष्टा” कबीर साहेब के काशी आने के बाद शेखतकी ने सोचा कि यह कबीर तो क...





