Saturday, February 9, 2019

राजनीति

घटिया राजनीति और मरता मानव

चाहा तो थी कुछ कर  गुजरने की पर मैदान में उतरा तो कीचड़ का दलदल नजर आया।
जी हां दोस्तों ! मैं बात कर रहा हूं वर्तमान भारतीय राजनीति की आज की भारतीय राजनीति समाज की अपेक्षाओं पर अपना ध्यान न देकर केवल राजनेता अपनी कुर्सी बचाने व कुर्सी प्राप्त करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है जनता विकास मांगती है ,राजनेता गंगा की बात करते हैं, जनता रोजगार मानती है राजनेता गाय की बात करते हैं, जनता किसी कारणवश निष्पक्ष न्याय के लिए सीबीआई जांच मांगते हैं नेता सीबीआई को खरीद लेते हैं,
साथियों बड़े दुख के साथ कहना चाहता हूं कि - आखिर हमारे देश की जनता ने क्या बिगाड़ा जो राजनेता "अपना उल्लू सीधा करने" के लिए जनता को भी "कोल्हू का बैल "बना देते
समझदार को संकेत काफी है हम वर्तमान भारतीय राजनीति की बात कर रहे हैं ।
साथियों यह आवाज रुकनी नहीं चाहिए कोशिश करने वालों की हार नहीं होती है
आखिर कब तक यह राजनेता चुनाव के समय तो एक साधु का रूप धारण कर लेते हैं और वोट रूपी भिक्षा मांगने के लिए घर -घर पर आ जाते हैं लेकिन जैसे ही भोली जनता को अपना मत दे देती है, अच्छा जानकर ये विजय होते ही रावण रूपी राक्षक का रूप धारण कर देते हैं और जिस वोट रूपी भिक्षा से इनको जो पद प्राप्त हुआ है इनका दुरुपयोग शुरू कर देते हैं ,और जिन्होंने इनको वोट दिया उनके साथ ही अत्याचार करते रहते हैं ,और जनता की ना सुनकर अपनी मनमर्जी करते रहते हैं
साथियों में यह दुख भरी कहानी इसीलिए कहना चाहता  हूं
की अच्छे काम की शुरुआत हमेशा अपनों से ही की जाती है तो अब समय है ऐसी चापलूसी करने वाले राजनेताओं को उचित समय उचित जवाब देने का   ।   मैं यहां पर किसी भी पार्टी के पक्ष विपक्ष की बात नहीं कर रहा हूं मैं आम जनता के दर्द की बात कर रहा हूं , कि आज के राजनेता जनता की दर्द भरी कहानियां ना समझ कर सिर्फ मोटी मोटी बातें बना कर हमारे संविधान के प्रति समर्पित ना होकर अपना घर बनाने में लगते हैं, साथियों अब समय है जागरूक होने का
क्योंकि कहते हैं कि" हम सुधरेंगे युग सुधरेगा""

साथियों ! यहां पर हम सुधरने का अर्थ है "जागरूक होना"
जागरूकता के बारे में तो आपने सुना ही होगा कि हमें हमेशा जागरुक रहना चाहिए ताकि हमारा कोई भी शोषण न कर सके तो आज शिक्षित समाज  हैं ।
तो हम अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रह सकते हैं ।
लेकिन बड़े दुख के साथ कहना चाहता हूं कि जब कोई भी व्यक्ति वर्तमान समय में जागरूकता लाने के लिए या दूसरों को जागरूक करने के लिए या स्वयं जागरूक होने पर आज के राजनेता उनकी बातों को अपनी कुर्सी की ताकत से दबाना चाहते हैं।
साथियों ! लेकिन कब तक यह अपनी बात को दबाएंगे, मैंने पहले भी कहा था कि यह सूरत बदलनी चाहिए कोशिश करने वालों की हार नहीं होती ।
ये कार्य संत रामपाल जी महाराज ने किया लेकिन दुर्भाग्यवश बात है कि चापलूसी भरी गंदी राजनीति के राजनेताओं ने उनकी बात को अपने कुर्सी के दम पर दबाने की कोशिश की और अभी भी कोशिश कर रहे हैं । अपना पूरा दम लगा रहे हैं कि संत रामपाल जी महाराज ने जो आज के सिस्टम के खिलाफ अर्थात आज की गंदी राजनीति के खिलाफ आवाज उठाई उनको दबाया जाए आज भी उनकी बात को दबाने की पूरी कोशिश की जा रही है क्योंकि आज के राजनेता यही चाहते हैं कि जनता में से कोई भी उनके(राजनेता) खिलाफ आवाज उठाएं सिस्टम को जानने की कोशिश करें उनकी बात को दबा कर झूठे मुकदमे लगा कर जेल में डाल दिया जाए ताकि कोई दूसरा व्यक्ति भी उनके खिलाफ आवाज नहीं उठा सके साथियों आज के राजनेता तो अंग्रेजो से भी विकराल रूप धारण कर चुके हैं ,लेकिन यह कब तक चलेगा आखिरकार इन चापलूसी भरी राजनीति में इन भ्रष्ट राजनेताओं की पोल खोलनी ही होगी ,और आज पूरा देश सोशल मीडिया के माध्यम से यह जान गया है कि संत रामपाल जी महाराज निर्दोष है इनको एक पूरे षड्यंत्र के द्वारा फसाया गया है
लेकिन कहते  है, आज के राजनेता पैसे से मीडिया को खरीद सकते हैं लेकिन आज की शिक्षित जनता को नहीं खरीद सकते आज की जनता शिक्षित होने के नाते यह समझ रही है कि अब सिस्टम बदलना चाहिए यह सूरत बदलनी चाहिए अगर आप भी वर्तमान राजनीति में बदलाव चाहते हो और इस सिस्टम को जानकर बदलाव चाहते हो तो हमसे जुड़िए

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        धन्यवाद.......

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