Friday, October 26, 2018

#सचVSझूठ

महर्षि दयानंद सरस्वती

के अनुसार न तो बच्चों का विवाह सम्भव है और न ही समाज सुधार हो सकता है।
समु. 4 पृष्ट 71 पर लिखा है कि केरी आँख वाली लड़की से विवाह मत करो,किसी का नाम पार्वती गोदावरी गोमती आदि नदियों और पर्वतो पर हो उस लड़की से विवाह मत करो।
महर्षि दयानंद सरस्वती ने जीवो को भ्रमित करके बहुत पाप किया है। दयानंद सरस्वती ने अपनी मिथ्या धारणाओ को भी पवित्र वेदों में डाल दिया।
इन्होंने परमात्मा को निराकार बताते हुए जहा भी वेदों में परमात्मा को साकार लिखा वहाँ शब्द ही बदल दिये।
सत्यार्थ प्रकाश में लिखा है कि सूर्य आदि पर मनुष्य रहते है जबकि वेदों में ऐसा कहि प्रमाण नही है।
ओर ये बहुत सीधी बात है कि सूर्य पर किसी इंसान या वस्तु का पहुचना मतलब राख में बदल जाना।

Tuesday, October 23, 2018

भारतीय संस्कृति का नाशक समलैंगिकता...!


धारा 377 के अनुसार समलैंगिकता को कानूनी दर्जा मिल रहा है परंतु समलैंगिक विवाह करके लोग ना केवल सामाजिक नियमों को तोड़ रहे हैं बल्कि प्रकृति नियमों का भी उल्लंघन कर रहे हैं।

समलैंगिक विवाह के वैधानिक नियम ईश्वर के धार्मिक सिद्धांत के अनुसार नहीं हैं । मानवाधिकार और स्वतंत्रता के नाम पर समलैंगिक विवाह को वैधानिक मान्यता प्रदान करना समाज की प्रगति नहीं दर्शाता है । वास्तव में यह उसका पतन दर्शाता है । प्रगति की दौड में, हमें यह जानना आवश्यक है कि क्या योग्य है और क्या अयोग्य । जिस प्रकार हम बच्चों को गंदे पानी में ना खेलने अथवा गंदगी ना खाने की शिक्षा देते हैं, उसी प्रकार हमें योग्य और अयोग्य के विषय में समाज को शिक्षित करने की आवश्यकता है । ऐसा करने में विफल होने से, हम धर्म में और अधिक पतन के संकट को बढा सकते हैं और परिणामस्वरूप समाज के लोग और अधिक दु:खी होते जाएंगे ।
हमारा देश हमारी संस्कृति से ही जाना जाता है लेकिन समलैंगिकता को मंजूरी देना संस्कृति के पतन को मंजूरी देना है और यह हमें स्वीकार नहीं।
समलैंगिगता हमारी भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है, यह एक मानसिक विकार व बुराई है इसलिए इस बुराई को सभ्य समाज में फैलने से रोका जाए..!!

DivinePlay Of GodKabir

“ शेखतकी द्वारा कबीर साहेब को गुंड़ों से मरवाने की निष्फल कुचेष्टा” कबीर साहेब के काशी आने के बाद शेखतकी ने सोचा कि यह कबीर तो क...