Friday, October 26, 2018

#सचVSझूठ

महर्षि दयानंद सरस्वती

के अनुसार न तो बच्चों का विवाह सम्भव है और न ही समाज सुधार हो सकता है।
समु. 4 पृष्ट 71 पर लिखा है कि केरी आँख वाली लड़की से विवाह मत करो,किसी का नाम पार्वती गोदावरी गोमती आदि नदियों और पर्वतो पर हो उस लड़की से विवाह मत करो।
महर्षि दयानंद सरस्वती ने जीवो को भ्रमित करके बहुत पाप किया है। दयानंद सरस्वती ने अपनी मिथ्या धारणाओ को भी पवित्र वेदों में डाल दिया।
इन्होंने परमात्मा को निराकार बताते हुए जहा भी वेदों में परमात्मा को साकार लिखा वहाँ शब्द ही बदल दिये।
सत्यार्थ प्रकाश में लिखा है कि सूर्य आदि पर मनुष्य रहते है जबकि वेदों में ऐसा कहि प्रमाण नही है।
ओर ये बहुत सीधी बात है कि सूर्य पर किसी इंसान या वस्तु का पहुचना मतलब राख में बदल जाना।

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